विश्वजीत सैनी की कविताएं।
यह ब्लाग मेरी हस्तलिखित कविताऔ के लिए समर्पित है।
रविवार, जून 26, 2011
बढे चले जा तू ...आये चाहे तूफान..
मंजिल है दूर ..
और राह है नहीं आसन
बढे चले जा तू....
आये चाहे तूफान..
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