जिन्दगी है सूनी-सूनी ,
किसी अनजाने की तलाश में|
एक उम्र गुजार दी हमने
कोई तो आएगा हमारी जिन्दगी,
इसी आश में|
कितने मौसम आये और गए,
लग जाती है आग,
सावन की बरसात में|
कोई तो अपना सा हो
तड़फते रहते हैं,
सारी सारी रात में,
जिन्दगी है सूनी-सूनी ,
किसी अनजाने की तलाश में|
ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है .
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना । आभार
प्रत्युत्तर देंहटाएंढेर सारी शुभकामनायें.
Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
धन्यवाद भास्कर जी,
प्रत्युत्तर देंहटाएंकई बार जब मन में विचारो का उन्माद उमड़ता है तो कविता बन जाती है
Bhai tu to bilkul hi kavi ban gya...
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